सीतापुर मानसी हत्याकांड: मोहब्बत के नाम पर मिला सिर्फ धोखा और दर्दनाक अंत

 


कहते हैं प्यार इंसान को जीना सिखाता है, लेकिन जब इसी प्यार के पीछे कोई दरिंदा छुपकर बैठा हो, तो अंजाम रूह कंपा देने वाला होता है। ऐसा ही एक खौफनाक मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर से सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। 22 साल की मासूम लड़की मानसी, जिसने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिससे वो बेइंतहा मोहब्बत करती है, वही उसकी जिंदगी का कातिल बन जाएगा।

​अचानक गायब हुई मानसी और कातिल का 'शरीफ' नाटक

​बात 25 मई से शुरू होती है, जब मानसी अचानक रहस्यमयी तरीके से गायब हो गई। घरवाले परेशान, आंखें पथराई हुई और पुलिस हर तरफ सुराग तलाशने में जुटी थी। इधर मानसी गायब थी और उधर उसका तथाकथित प्रेमी, विशाल पाल, समाज के सामने बड़ा ही शरीफ और बेकसूर बनने का नाटक रच रहा था। उसे लगा कि वो अपने इस शातिर चेहरे के पीछे अपने गुनाह को हमेशा के लिए छुपा लेगा।

​रिमांड पर टूट पड़ा विशाल, उबला सबका खून

​कहते हैं न कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। पुलिस को जब विशाल पर शक हुआ, तो उन्होंने उसे रिमांड पर लिया। खाकी का रौब और सख्ती के आगे विशाल का वो 'शरीफ' मुखौटा ज्यादा देर टिक नहीं पाया। जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने वो सच उगला जिसे सुनकर खुद पुलिस वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए।

​विशाल के कबूलनामे के बाद लखनऊ के बख्शी का तालाब इलाके से मानसी की क्षत-विक्षत (बुरी तरह कटी-फटी) लाश बरामद हुई। मोहब्बत के बदले मानसी को ऐसी बेरहम मौत मिलेगी, यह सोचकर ही पूरे इलाके के लोगों का खून खौल उठा है।

​अब क्या होनी चाहिए इस दरिंदे की सजा?

​कातिल विशाल पाल अब सलाखों के पीछे अपने कर्मों की सजा गिन रहा है। पुलिस मामले की हर कड़ी को जोड़ने में लगी है ताकि कोर्ट में उसे सख्त से सख्त सजा दिलवाई जा सके।

​लेकिन यहाँ सवाल यह उठता है कि ऐसे वहशी और बेरहम दरिंदों के लिए हमारे समाज और कानून में क्या सजा होनी चाहिए? क्या ऐसे शख्स को सीधे फांसी के फंदे पर लटका देना चाहिए या फिर सरेआम कोई ऐसी सजा दी जाए जिसे देखकर आगे कोई ऐसी हैवानियत करने की जुर्रत न कर सके?


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