इंसानियत शर्मसार: राजस्थान में 13 साल की मासूम से दरिंदगी, आखिर कब तक सहेंगी हमारी बेटियां?


 

​आज दिल दिमाग सब सुन्न है। जब भी लगता है कि अब इससे बुरा क्या ही सुनेंगे, तभी समाज का कोई ऐसा घिनौना चेहरा सामने आ जाता है जो अंदर तक झकझोर देता है। राजस्थान से एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसे सुनकर किसी भी सीधे-साधे इंसान का खून खौल उठे। एक 13 साल की मासूम बच्ची, जिसे अभी दुनिया की समझ भी नहीं थी, उसके साथ जो हुआ वो इंसानियत के नाम पर सबसे बड़ा कलंक है।

​क्या है पूरा मामला? (जब रक्षक ही भक्षक बन गया)

​बात इतनी खौफनाक है कि बताते हुए भी रोंगटे खड़े हो रहे हैं। वह मासूम बच्ची रोज की तरह अपने स्कूल से निकली और घर जाने के लिए उसने एक ऑटो किया। उसे क्या पता था कि जिस ऑटो वाले पर भरोसा करके वो बैठी है, वो उसे घर नहीं बल्कि नरक के रास्ते पर ले जा रहा है।

​उस ऑटो वाले ने उस बच्ची को घर छोड़ने के बजाय एक होटल में ले जाकर बेच दिया। इसके बाद जो हुआ, वो हैवानियत की सारी हदें पार कर गया:

  • 30 लोगों की दरिंदगी: उस 13 साल की मासूम को अलग-अलग होटलों में ले जाया गया और महज 5 दिनों के अंदर 30 से ज्यादा दरिंदों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gang-R*pe) किया।
  • नशे का इंजेक्शन: बच्ची को इस कदर प्रताड़ित किया गया, उसे भारी नशा दिया जाता था ताकि उसे उस दर्द का अहसास न हो सके, जो वो हैवान उसे दे रहे थे।
  • पुलिस की लापरवाही: रिपोर्ट्स की मानें तो इस मामले में स्थानीय पुलिस को पहले भी इनपुट्स मिले थे कि इलाकों के होटलों में मासूम बच्चियों के साथ देह व्यापार का धंधा चल रहा है, लेकिन प्रशासन समय रहते नहीं जागा।

​आज वह बच्ची अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है। शारीरिक चोटें तो शायद वक्त के साथ भर जाएं, लेकिन जो दिमागी सदमा (Trauma) उसे मिला है, उससे वो जिंदगी भर कैसे उबर पाएगी?

​देश की बेटियों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल

​इस घटना ने एक बार फिर हमारे पूरे सिस्टम और समाज को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आज हर बाप, हर भाई अपनी बहन-बेटी को घर से बाहर भेजने में डर रहा है। एक सीधा सा सवाल जो हर किसी के जेहन में आ रहा है: क्या हमारे देश में कोई ऐसी उम्र बची है, जिसमें हम कह सकें कि हमारी महिलाएं, हमारी बच्चियां सुरक्षित हैं?

​एक छोटी बच्ची से लेकर बुजुर्ग महिला तक, कोई भी इन दरिंदों से महफूज नहीं है। आखिर हम किस समाज की तरफ बढ़ रहे हैं?

​एक्सपर्ट ओपिनियन: कानून और समाज में कहां कमी है?

​सिर्फ मोमबत्ती जलाने या सोशल मीडिया पर गुस्सा निकालने से अब काम नहीं चलने वाला। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए हमें जड़ पर वार करना होगा:

​1. कानून का खौफ जरूरी (फास्ट ट्रैक कोर्ट)

​हमारे देश में कानून तो हैं, लेकिन इंसाफ मिलने में सालों लग जाते हैं। ऐसे मामलों में केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाना चाहिए और अपराधियों को चंद महीनों के भीतर ऐसी सख्त से सख्त सजा (जैसे सरेआम फांसी या कड़ा कृत्य) मिलनी चाहिए ताकि अगली बार ऐसा कुछ सोचने से पहले भी किसी की रूह कांप जाए।

​2. होटलों और लॉज की सख्त मॉनिटरिंग

​अक्सर देखा जाता है कि छोटे होटलों और लॉज में बिना सही वेरिफिकेशन के ऐसे गंदे धंधे चलते रहते हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस को हर छोटे-बड़े होटल की औचक चेकिंग करनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले होटल मालिकों के लाइसेंस तुरंत रद्द कर उन पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

​3. ऑटो और कैब चालकों का कड़ा वेरिफिकेशन

​पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल हर आम इंसान करता है। सरकार को चाहिए कि हर ऑटो, रिक्शा और कैब ड्राइवर का प्रॉपर पुलिस वेरिफिकेशन हो और गाड़ियों में जीपीएस (GPS) या पैनिक बटन जैसी सुविधाएं अनिवार्य की जाएं, जो सीधे पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़ी हों।

​हमारा नजरिया: अब चुप रहने का वक्त नहीं है

​यह मामला सिर्फ राजस्थान का नहीं है, यह पूरे देश की कानून व्यवस्था और हमारी मानसिकता की नाकामी है। जब तक समाज में ऐसे अपराधियों को पनाह मिलती रहेगी या पुलिस-प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा, तब तक निर्भया और इस 13 साल की बच्ची जैसी घटनाएं होती रहेंगी।

​हमे अपनी बेटियों को तो मजबूत बनाना ही होगा, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है कि अपने बेटों को तमीज और इंसानियत सिखाई जाए। सरकार और न्याय प्रणाली से अब जनता सिर्फ एक ही चीज मांग रही है—तुरंत और कड़ा न्याय! इस बच्ची के गुनहगारों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो इतिहास बन जाए।

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