"मैं कॉकरोच हूँ": दिल्ली पहुंचा Gen-Z का अनोखा आंदोलन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ "कॉकरोच जनता पार्टी" (CJP) आंदोलन अब सड़कों तक पहुंच चुका है। देशभर के सैकड़ों युवा राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
इस आंदोलन की शुरुआत तब हुई जब देश के एक वरिष्ठ न्यायिक पदाधिकारी की युवाओं को "कॉकरोच" से जोड़ने वाली टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। इसी के जवाब में अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय युवा अभिजीत डिपके ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया—"क्या होगा अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?" यही सवाल धीरे-धीरे एक डिजिटल आंदोलन में बदल गया।
छात्रों के गुस्से ने पकड़ी रफ्तार
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं में पेपर लीक, मूल्यांकन संबंधी विवाद और प्रशासनिक गड़बड़ियों ने छात्रों में भारी नाराजगी पैदा की है। प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों का कहना है कि उनकी मेहनत और भविष्य के साथ बार-बार खिलवाड़ हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
मध्य प्रदेश से आए 17 वर्षीय छात्र सौरव कुशवाहा ने बताया कि वह केवल इस उम्मीद में दिल्ली पहुंचे हैं कि छात्रों की आवाज सरकार तक पहुंचे। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल परीक्षा प्रणाली की खामियों के खिलाफ नहीं, बल्कि युवाओं की अनदेखी के खिलाफ भी है।
"सारे कॉकरोच एकजुट हो जाओ"
कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से अपील की थी कि वे जंतर-मंतर पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद करें। इस आह्वान का असर इतना व्यापक रहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र और युवा दिल्ली पहुंच गए।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में किताबें थीं, कुछ लोग कॉकरोच के मुखौटे पहनकर आए थे और कई लोग गुलाब के फूल लेकर पहुंचे। उनका संदेश साफ था—यह आंदोलन व्यंग्य से शुरू हुआ जरूर है, लेकिन इसके पीछे युवाओं की वास्तविक चिंताएं और नाराजगी छिपी हुई है।
अभिजीत डिपके बने आंदोलन का चेहरा
अमेरिका से दिल्ली पहुंचे अभिजीत डिपके ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
डिपके ने कहा कि यह धारणा गलत है कि आज का युवा केवल सोशल मीडिया तक सीमित है। उनका दावा था कि देश का युवा अब अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बोलने और सड़कों पर उतरने के लिए तैयार है।
केवल छात्रों का नहीं, आम लोगों का भी समर्थन
प्रदर्शन में शामिल कई लोग सीधे तौर पर छात्र नहीं थे। दिल्ली-एनसीआर में काम करने वाले कुछ श्रमिक और डिलीवरी कर्मी भी आंदोलन में शामिल हुए। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बेहतर होगा।
एक पुलिस अधिकारी ने भी नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अभिभावकों की चिंताएं भी छात्रों जैसी ही हैं और युवाओं के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्या यह आंदोलन बदलाव ला पाएगा?
फिलहाल सरकार की ओर से इस प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि सोशल मीडिया पर शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक अभियान अब एक बड़े युवा आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में से एक है। ऐसे में शिक्षा, रोजगार और अवसरों से जुड़े मुद्दों पर युवाओं की बढ़ती सक्रियता आने वाले समय में राजनीति और नीतियों को प्रभावित कर सकती है।
कॉकरोच जनता पार्टी का यह प्रदर्शन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की आवाज बनकर उभरा है जो अपने भविष्य को लेकर जवाब मांग रही है।
