पश्चिम बंगाल में भीषण आग: 4,000 से ज़्यादा EVM और VVPAT जलकर खाक, क्या है इस घटना के पीछे का सच?

 


कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आई है। कोलकाता के अलीपुर इलाके में स्थित एक सरकारी इमारत में भीषण आग लग जाने के कारण वहां रखी 4,000 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) और वीवीपीएटी (VVPAT) मशीनें पूरी तरह जलकर खाक हो गई हैं। इस घटना ने राज्य की चुनावी सुरक्षा और प्रशासनिक तत्परता पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

​9 मंजिला इमारत में लगी भीषण आग

​मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना दक्षिण 24 परगना जिला परिषद समेत कई महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तरों वाली एक 9 मंजिला इमारत में घटित हुई। इसी इमारत के एक हिस्से में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों की EVM और VVPAT मशीनों को सुरक्षित रखा गया था। अचानक लगी इस भीषण आग ने देखते ही देखते पूरी जगह को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भयानक थी कि कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच रखी गईं हज़ारों मशीनें महज कुछ ही समय में मलबे में तब्दील हो गईं।

​10 विधानसभा क्षेत्रों का डेटा मात्र 10 मिनट में नष्ट

​वीडियो रिपोर्ट के मुताबिक, इस अग्निकांड के कारण लगभग 10 विधानसभा क्षेत्रों का चुनावी डेटा मात्र 10 मिनट के भीतर पूरी तरह नष्ट हो गया। चौंकाने वाली बात यह है कि ये वही EVM और VVPAT मशीनें थीं, जिनका उपयोग हाल ही में हुए बंगाल चुनाव में किया गया था। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिन मशीनों में कथित गड़बड़ी या घोटालों को लेकर कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुकी थीं, और जिन मशीनों पर टीएमसी के नेता लगातार विरोध दर्ज करा रहे थे, वे सभी मशीनें इस हादसे में जलकर राख हो चुकी हैं।

​इस घटना के बाद से ही राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ गई है। प्रशासनिक सूत्रों और समाचार चैनलों के अनुसार, अब सबसे बड़ा और अहम सवाल यह बना हुआ है कि कड़ी सुरक्षा वाली इस सरकारी इमारत में आखिर यह आग लगी कैसे? क्या यह महज एक शॉर्ट-सर्किट की वजह से हुआ हादसा था या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी है? फिलहाल मामले की जांच जारी है।

​हमारा दृष्टिकोण और ओपिनियन (Expert & Analysis)

​एक जागरूक नागरिक और विश्लेषक के तौर पर, इस घटना को केवल एक साधारण 'अग्निकांड' मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में जनता का विश्वास चुनाव प्रणाली और उसकी पारदर्शिता पर टिका होता है। EVM और VVPAT मशीनों का इस तरह से नष्ट होना कई गंभीर चिंताओं को जन्म देता है:

  • सुरक्षा प्रोटोकॉल पर बड़ा सवाल: जिन जगहों पर चुनाव से जुड़ी संवेदनशील मशीनें या दस्तावेज़ रखे जाते हैं, उन्हें 'स्ट्रांग रूम' या अत्यधिक सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है। वहां 24 घंटे सुरक्षा बल तैनात रहते हैं और फायर सेफ्टी (आग से बचाव) के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। ऐसे में 9 मंजिला इमारत में इतनी भीषण आग लग जाना और 10 मिनट में सब कुछ स्वाहा हो जाना, प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।
  • पारदर्शिता और जनता का भरोसा: जब भी किसी चुनाव परिणाम या मशीन को लेकर विपक्षी दलों द्वारा कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही हो, तो उन साक्ष्यों (Evidence) को संभाल कर रखना चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। साक्ष्यों के इस तरह नष्ट होने से चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल उठते हैं और जनता के मन में संदेह पैदा होता है।
  • डिजिटल बैकअप की आवश्यकता: आज के आधुनिक युग में जब हम हर चीज़ के डिजिटलीकरण की बात करते हैं, तो क्या इन मशीनों के डेटा का कोई सुरक्षित क्लाउड या बाहरी सर्वर पर बैकअप नहीं होना चाहिए? यदि कोई तकनीकी या भौतिक खराबी आती है, तो डेटा को रीकवर करने का एक ठोस विकल्प हमेशा मौजूद रहना चाहिए ताकि लोकतंत्र के फैसले को कोई नुकसान न पहुंचे।
  • एक विशेष व्यक्तिगत विचार:

    "लोकतंत्र में जनता का वोट केवल एक बटन दबाना नहीं, बल्कि देश के भविष्य का फैसला होता है; इसलिए चुनावी साक्ष्यों की सुरक्षा में हुई एक छोटी सी लापरवाही भी पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को दांव पर लगा देती है।"


    ​इस मामले में केवल विभागीय जांच ही काफी नहीं है, बल्कि एक निष्पक्ष और उच्च स्तरीय न्यायिक या केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। जब तक इस आग की असली वजह सामने नहीं आती, तब तक इस तरह के हादसों पर राजनीतिक बयानबाज़ी और जनता का अविश्वास थमने वाला नहीं है।

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