आजकल देश में धरने-प्रदर्शनों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। कभी इस बात पे बवाल, तो कभी उस बात पे चक्का जाम। लेकिन भाई, कभी ठंडे दिमाग से सोचा है कि इन बड़े-बड़े प्रोटेस्ट और नेताओं को बदलने से क्या सच में कुछ बदलेगा? सच तो यह है कि तुम मंत्रियों को तो शायद कुर्सी से हटा दोगे, लेकिन जो सिस्टम को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं, वो हैं हमारे देश के 'सरकारी बाबू'। ये वो दीमक हैं जो कुर्सी पर ऐसे चिपकते हैं कि देश का सारा माल चट कर जाते हैं।
आइए आपको ओडिशा के ऐसे ही दो बड़े 'बाबूओं' के कारनामे दिखाते हैं, जो पिछले 24 घंटों में सुर्खियों में आए हैं।
1. 30 हजार की सैलरी और करोड़ों का साम्राज्य: मिलिए बैकुंठ नाथ बेहरा से
सबसे पहले नजर डालिए इस चेहरे पर। देखने में शायद आपको यह इंसान बड़ा सीधा-साधा और मजबूर लगे, लेकिन इसका असली खेल जानकर आपके होश उड़ जाएंगे। इनका नाम है बैकुंठ नाथ बेहरा। यह सरकारी महकमे में एक इंजीनियर के तौर पर काम करते थे और सरकार से इन्हें सिर्फ 30,000 रुपये महीना सैलरी मिलती थी।
अब आप सोचेंगे कि 30 हजार कमाने वाला बंदा दाल-रोटी ही मुश्किल से चला पाता होगा? लेकिन जब ओडिशा विजिलेंस विभाग ने इनके घर पर रेड मारी, तो जो सच सामने आया उसने सबके तोते उड़ा दिए:
- 13 आलीशान प्लॉट्स: जयपुर और भुवनेश्वर जैसी प्राइम लोकेशंस पर।
- 5 बड़ी बिल्डिंग्स: आलीशान मकान और इमारतें।
- 34 तोला सोना: घर में पीला धातु ठसाठस भरा था।
- 2 करोड़ रुपये कैश: अलमारियों से कड़कड़ाते नोटों के बंडल बरामद हुए।
यह सारा काला साम्राज्य इन्होंने 'असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (सिविल)' के पद पर रहते हुए, गवर्नमेंट की इंटीग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट एजेंसी (ITDA) में बनाया। और मजेदार बात? अभी तो जांच चल ही रही है, आगे और क्या-क्या निकलेगा, राम जाने!
2. रिश्वत लेते पकड़े गए, तो मिला 'प्रमोशन': धीमान चाकमा की कहानी
अब आप सोच रहे होंगे कि भाई, पकड़े गए तो जेल जाएंगे और सजा मिलेगी? अरे भाई, यह भारत का सिस्टम है, यहाँ इतनी जल्दी उम्मीद मत पालो!
अब मिलिए दूसरे साहब से—धीमान चाकमा (IAS Officer)। ठीक एक साल पहले, ओडिशा विजिलेंस ने इन्हें 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा था। तलाशी में इनके पास से 50 लाख रुपये और मिले थे। अब नियम के मुताबिक तो इन्हें जेल की हवा खानी चाहिए थी, लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट!
आज एक साल बाद, ओडिशा सरकार ने उन पर केस चलने के बावजूद उन्हें 'रेवेन्यू एंड डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट' में डिप्टी सेक्रेटरी की मलाईदार पोस्ट सौंप दी है! मतलब, रिश्वत खाओ और बड़ा पद पाओ!
सिस्टम की असली हकीकत
हमारे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने संसद में एक बहुत बड़ी बात कही थी: "सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, मगर यह देश रहना चाहिए।"
वाजपेयी जी की इसी बात को आगे बढ़ाते हुए आज यह कहना गलत नहीं होगा कि पार्टियां और नेता तो बदलते रहते हैं, लेकिन ये जो भ्रष्ट सरकारी बाबू हैं, जो कभी नहीं बदलते, ये इस देश को रहने लायक भी नहीं छोड़ रहे हैं।
सोचिए, यह तो सिर्फ एक राज्य (ओडिशा) के दो उदाहरण हैं। देश के हर कोने में, हर सरकारी दफ्तर में ऐसे कितने दीमक बैठे होंगे जो हमारे टैक्स के पैसों को और पूरे सिस्टम को खोखला कर रहे हैं। इस कड़वे सच को पहचानना और इसके खिलाफ आवाज उठाना अब बेहद जरूरी हो गया है।


