सड़क पर कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता। इसीलिए हमेशा कहा जाता है कि गाड़ी चाहे जितनी भी स्टाइलिश हो, उसकी मजबूती सबसे ज्यादा मायने रखती है। कुछ ऐसा ही नजारा उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर में देखने को मिला, जहां एक बहुत ही भयानक सड़क हादसा हुआ। इस हादसे की तस्वीरें देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं, लेकिन इस पूरी घटना में जो सबसे अच्छी बात रही, वो यह कि कार की शानदार बिल्ड क्वालिटी की वजह से 6 लोगों की जान बाल-बाल बच गई।
आइए जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है, हादसा कैसे हुआ और गाड़ियों में 'सेफ्टी रेटिंग' व 'मजबूत बिल्ड क्वालिटी' का होना क्यों जरूरी है।
कैसे और कहां हुआ यह भीषण हादसा?
यह दुर्घटना बिजनौर के धामपुर में नेशनल हाईवे पर राजपूताना रिसॉर्ट के पास शनिवार को हुई। बताया जा रहा है कि एक तेज रफ्तार टाटा सिएरा (Tata Sierra) कार अचानक अनियंत्रित हो गई।
- प्रत्यक्षदर्शियों का क्या कहना है? मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, कार की रफ्तार काफी तेज थी। नियंत्रण खोने के बाद कार सबसे पहले सड़क के बीच बने डिवाइडर से टकराई।
- पलट गई गाड़ी: डिवाइडर से टकराने के बाद कार का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और वह सड़क पर ही कई बार पलटती चली गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग दहल गए।
- रफ्तार पर काबू रखें: हाईवे साफ दिखने पर अक्सर लोग गाड़ी की स्पीड 100-120 किमी/घंटा से ऊपर ले जाते हैं। याद रखें, तेज स्पीड में अचानक कोई जानवर या गड्ढा सामने आने पर गाड़ी को संभालना नामुमकिन हो जाता है।
- सीट बेल्ट है सबसे जरूरी: इस हादसे में सभी 6 लोगों के बचने की एक बड़ी वजह यह भी रही होगी कि उन्होंने सीट बेल्ट पहनी थी। सीट बेल्ट आपको गाड़ी पलटने के दौरान अपनी जगह से हिलने नहीं देती, जिससे सिर और छाती में गंभीर चोट नहीं लगती।
- थकान होने पर गाड़ी न चलाएं: शादी-ब्याह के माहौल से लौटते समय अक्सर लोग थके होते हैं। अगर हल्की सी भी नींद की झपकी आ जाए, तो गाड़ी तुरंत अनियंत्रित हो जाती है। लंबी यात्रा में बीच-बीच में ब्रेक जरूर लें।
चमत्कारी बचाव: गाड़ी की हालत देखकर ऐसा लग रहा था कि शायद ही अंदर कोई सुरक्षित बचा हो, लेकिन जैसे ही लोग मदद के लिए दौड़े, अंदर बैठे सभी लोग सुरक्षित बाहर निकल आए। इसे किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।
कौन थे कार में सवार लोग?
कार को खुद प्रकाश पांडे चला रहे थे, जो उत्तराखंड के हल्द्वानी के रहने वाले हैं। प्रकाश पांडे अपने पूरे परिवार के साथ देहरादून में एक भांजी की शादी में शामिल होने गए थे और वहां से वापस हल्द्वानी लौट रहे थे। कार में उनके साथ उनकी पत्नी, बेटियां और छोटे बच्चे समेत कुल 6 लोग सवार थे।
हादसे के बाद खुद प्रकाश पांडे ने बताया:
"मुझे खुद समझ नहीं आया कि पलक झपकते ही क्या से क्या हो गया। बस गाड़ी अनियंत्रित हुई और पलट गई। भगवान का शुक्र है कि मेरी पत्नी, बच्चों और मुझे हल्की-फुल्की चोटें ही आईं। गाड़ी ने हमें पूरी तरह से महफूज रखा।"
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग देवदूत बनकर सामने आए। उन्होंने तुरंत गाड़ी को सीधा किया, सभी घायलों को बाहर निकाला और पास के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है और सभी खतरे से बाहर हैं। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और मामले की जांच में जुट गई है।
टाटा सिएरा की मजबूती की हो रही है जमकर तारीफ
इस हादसे के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर टाटा की इस गाड़ी की मजबूती की खूब चर्चा हो रही है। लोग कह रहे हैं कि अगर गाड़ी की जगह कोई हल्की या कम सेफ्टी रेटिंग वाली कार होती, तो शायद नतीजा कुछ और ही होता। कार का केबिन एरिया (जहां लोग बैठते हैं) पूरी तरह सुरक्षित रहा, जिसके कारण एयरबैग्स और मजबूत पिलर्स ने पैसेंजर्स को झटके और सीधी चोट से बचा लिया।
एक्सपर्ट ओपिनियन: गाड़ी खरीदते समय सेफ्टी को क्यों रखें नंबर 1 पर?
आजकल लोग गाड़ी खरीदते समय केवल उसका माइलेज, लुक, टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और सनरूफ देखते हैं। लेकिन यह हादसा हमें सिखाता है कि सेफ्टी फीचर्स और क्रैश टेस्ट रेटिंग सबसे जरूरी चीजें हैं। ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स के अनुसार, गाड़ियों में सुरक्षा के लिहाज से निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है:
1. क्रैश टेस्ट रेटिंग (Global NCAP / Bharat NCAP)
गाड़ी लेने से पहले हमेशा उसकी क्रैश टेस्ट रेटिंग चेक करें। 4-स्टार या 5-स्टार रेटिंग वाली गाड़ियाँ दुर्घटना के समय झटके को खुद सोख लेती हैं और केबिन के अंदर बैठे लोगों तक उसका असर नहीं पहुंचने देतीं।
2. इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और ABS
तेज रफ्तार में जब गाड़ी अचानक मुड़ती है या डिवाइडर से टकराती है, तो ESC गाड़ी को फिसलने या पलटने से रोकता है। वहीं ABS (एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम) अचानक ब्रेक लगाने पर टायरों को लॉक होने से बचाता है।
3. एयरबैग्स और मजबूत पिलर्स (A, B, C Pillars)
जब गाड़ी पलटती है, तो गाड़ी की छत और पिलर्स पर पूरा वजन आ जाता है। अगर पिलर्स कमजोर होंगे, तो छत दब जाएगी और अंदर बैठे लोगों को गंभीर चोट आ सकती है। मजबूत बॉडी शेल होने के कारण ही टाटा की गाड़ियों को भारत में सबसे सुरक्षित माना जाता है।
हाईवे पर सुरक्षित ड्राइविंग के लिए कुछ जरूरी टिप्स
इस हादसे से सबक लेते हुए हर ड्राइवर को कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए, ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके:
निष्कर्ष
बिजनौर के धामपुर का यह हादसा हमें यह साफ संदेश देता है कि जान है तो जहान है। टाटा सिएरा ने अपनी मजबूती साबित कर दी और 6 परिवारों के चिरागों को बुझने से बचा लिया। दिखावे और माइलेज के चक्कर में अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा से समझौता कभी न करें। हमेशा सुरक्षित चलें, यातायात के नियमों का पालन करें और एक जिम्मेदार नागरिक बनें।
