अयोध्या राम मंदिर में घोटाला? जानें दान पेटी से लेकर सोने की ईंटों के गायब होने की पूरी सच्चाई

 


अयोध्या। सनातन धर्म के सबसे बड़े आस्था के केंद्र, भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। सोशल मीडिया और कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि राम मंदिर में करोड़ों रुपये की हेराफेरी और चोरी हुई है। इस पूरे मामले की जांच के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन करना पड़ा। आइए इस पूरे विवाद को गहराई से समझते हैं कि आखिर राम जन्मभूमि परिसर के अंदर चल क्या रहा है।

​कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद?

​इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने एक बहुत ही सनसनीखेज दावा किया। उनका कहना है कि साल 1989 में राम मंदिर आंदोलन के समय देश-विदेश के गांवों और शहरों से पूजित होकर आईं 1250 सोने, चांदी, हीरे, रूबी और अष्टधातु की कीमती ईंटें अब गायब हो चुकी हैं। इन ईंटों की कीमत आज के समय में अरबों रुपये आंकी जा रही है। संतोष दुबे के इस आरोप के बाद मंदिर के मैनेजमेंट और ट्रस्ट पर उंगलियां उठनी शुरू हो गईं।

​दान पेटियों के पैसों की गिनती और गड़बड़ी का खेल

​राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, और उनकी सुविधा और दान के लिए पूरे परिसर में लगभग 35 डोनेशन बॉक्स (दान पेटियां) रखी गई हैं।

  • गिनती की प्रक्रिया: इन दान पेटियों में जमा होने वाले कैश और सोने-चांदी को मंदिर से करीब 200 मीटर दूर बने एक स्पेशल 'दान गणना केंद्र' (Donation Counting Center) में ले जाया जाता है।
  • शिफ्ट टाइमिंग: यह काउंटिंग दो शिफ्टों में होती है—सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक और फिर दोपहर 2:00 बजे से रात 8:00 बजे तक।
  • नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) के आरोप: आरोप है कि इस काउंटिंग सेंटर में पैसे गिनने के लिए जिन लोगों को रखा गया है, उनमें से कई लोग मंदिर की मुख्य कमेटी के सदस्यों के सगे-संबंधी और रिश्तेदार हैं।

​शक के घेरे में आए मुख्य चेहरे

​इस पूरे घोटाले में मंदिर प्रशासन से जुड़े कई बड़े नामों पर गंभीर आरोप लगे हैं:

  1. गोपाल राव (मंदिर के मैनेजर): इनका काम मंदिर में स्टाफ की नियुक्ति करना है। इनके सगे भतीजे सोमेश आनंद पर आरोप है कि उनका काम सिर्फ व्हीलचेयर की व्यवस्था देखना था, लेकिन उनका प्रभाव इतना बढ़ गया कि वे सीधे डोनेशन काउंटिंग रूम में दखल देने लगे। यहां तक कि वीआईपी पास जारी करने और मंदिर के कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्टर्स का पेमेंट क्लियर कराने में भी उनकी मंजूरी ली जाती थी।
  2. रामशंकर यादव: इनका काम दान में मिले पैसों को सुरक्षित बैंक में डिपॉजिट करवाना था। इन पर आरोप लगा है कि इन्होंने सुबूत मिटाने के लिए 8 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ही डिलीट कर दी। इनके भतीजे मनीष यादव को भी काउंटिंग टीम में शामिल किया गया था।
  3. अनिल मिश्रा (ट्रस्टी): मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा के एक करीबी रिश्तेदार के घर पर जब जांच हुई, तो सूखे उपलों (गोबर के कंडे) के नीचे से 12 लाख रुपये कैश बरामद हुए। इसके साथ ही यह भी पता चला कि इस परिवार ने हाल ही में 65 लाख रुपये की एक बेनामी प्रॉपर्टी भी खरीदी थी।
  4. चंपत राय (जनरल सेक्रेटरी): चूंकि कीमती ईंटों और सामान को संभालने की मुख्य जिम्मेदारी मंदिर के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय की थी, इसलिए इस पूरे मामले में उनकी भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

​फर्जी ट्रस्ट और 'सीता रसोई' का फर्जीवाड़ा

​जांच में यह भी सामने आया है कि राम मंदिर के नाम पर कुछ लोगों ने फर्जीवाड़ा करने के लिए 'सीता रसोई' नाम से एक फर्जी ट्रस्ट बना लिया था। इस फर्जी ट्रस्ट के जरिए सीधे-साधे और भोले-भाले भक्तों से दान लिया जा रहा था और उस पैसे को मंदिर के खाते में जमा करने के बजाय खुद हड़पा जा रहा था। अब एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि देश में ऐसे और कितने फर्जी ट्रस्ट राम मंदिर के नाम पर एक्टिव हैं।

​एसआईटी (SIT) की जांच और 9 पेन ड्राइव का राज

​मामला बढ़ता देख जब समाजवादी पार्टी के नेताओं और खुद मंदिर के कुछ ईमानदार स्टाफ ने चोरी की शिकायत की, तो योगी सरकार ने तुरंत एसआईटी (SIT) की टीम को केस सौंप दिया। एसआईटी ने लगातार 6 दिनों तक संदिग्धों से कड़ी पूछताछ की। इस पूरी जांच, सुबूतों और बयानों को 9 डिजिटल पेन ड्राइव में सुरक्षित स्टोर किया गया है। एसआईटी अपनी यह प्रारंभिक रिपोर्ट बहुत जल्द मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपने वाली है, जिसके बाद दोषियों पर ताबड़तोड़ एफआईआर (FIR) दर्ज होना तय माना जा रहा है।

​हमारा नजरिया (Our Opinion): आस्था पर चोट बर्दाश्त नहीं!

"राम काज कीन्हेज बिनु मोहि कहां विश्राम" — जहां करोड़ों सनातनी अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा प्रभु श्री राम के चरणों में इस अटूट विश्वास के साथ अर्पित करते हैं कि उससे एक भव्य और पवित्र मंदिर का संचालन होगा, वहां इस तरह के घपले-घोटाले की खबर आना बेहद शर्मनाक और दिल दुखाने वाला है।

​कानूनी तौर पर तो यह एक बहुत बड़ा क्रिमिनल फ्रॉड है ही, लेकिन आध्यात्मिक और धार्मिक नजरिए से देखा जाए तो यह साक्षात प्रभु श्री राम के साथ और करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था के साथ किया गया महापाप है। जो लोग भगवान के घर को भी अपनी लालच का जरिया बनाते हैं, उन्हें समाज और कानून की तरफ से ऐसी सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए जो एक मिसाल बन सके। राजनीति से ऊपर उठकर इस पूरे मामले को पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने लाना बेहद जरूरी है ताकि राम मंदिर की पवित्रता पर कभी कोई आंच न आ सके।

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