न्याय या एनकाउंटर: भरत तिवारी की कहानी

 

सच में अगर भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो फिर ये गोलियाँ क्यों चलीं? भोजपुर के भरत तिवारी के एनकाउंटर से पहले उनकी क्या माँगें थीं, जरा आप भी सुनिए।

भरत तिवारी की माँगें (वीडियो क्लिप के अनुसार):

​"पहला यही माँग है कि समाज में और ये पूरे देश में आज के बाद कोई भी नेता, मंत्री, विधायक, कोई अधिकारी समाज के साथ खिलवाड़ नहीं करेगा, झूठा वादा नहीं करेगा। अगर करेगा, तो उसे किसी भी हाल में पूरा करना पड़ेगा और नहीं करेगा, तो मेरे जैसे लोगों को हथियार उठाना पड़ेगा। और दूसरी बात ये है कि हमारे समाज और देश में जो भी, जहाँ भी जो कार्य होना चाहिए, हर गाँव, हर मोहल्ले, हर शहर, हर कस्बे के लिए सामाजिक काम, विकास का कार्य जिससे हमारा देश आगे बढ़े, तो उन सभी, उन सभी कार्यों को बिना किसी लापरवाही के साथ, बिना भ्रष्टाचार के साथ और बिना किसी, कुछ भी गलत कार्य के साथ अच्छे से किया जाए, पूरी तरह से धरातल पर।"


​हमने साफ-साफ सुना, इन्होंने एक बार भी अपनी जान की भीख नहीं माँगी। जब भी बात की, समाज की बात की, जब भी बात की, विकास की ही बात की। इन्होंने बोला कि यदि नेता कोई भी वादा करके वोट लेता है तो उस वादे को इसे पूरा करना ही पड़ेगा, कोई भी झूठा वादा नहीं चलेगा। और पता है? इन सबके बदले इन्हें गोली खानी पड़ी, अपनी जान गवानी पड़ी।

​सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या यदि कोई समाज की बात करेगा, विकास की बात करेगा, नेताओं की गलतियों को दिखाएगा, उसकी जान ले ली जाएगी? हाँ, मानता हूँ कि इनका तरीका गलत था, प्रशासन के सामने इन्हें हथियार नहीं दिखाना था, लेकिन लास्ट में इन्होंने अपना हथियार फेंक कर आत्मसमर्पण किया तो था ना? फिर गोली क्यों मारी?

​ये सिर्फ और सिर्फ भरत तिवारी का एनकाउंटर नहीं है, ये हमारे समाज, विकास सबका खात्मा है। यदि आज हम भरत तिवारी के इंसाफ के लिए आवाज नहीं उठाते हैं तो याद रखिएगा अगला जो भी समाज का बात करने वाला बंदा होगा, उसे याद सताएगा कि था एक भरत तिवारी जो हमारे समाज के लिए लड़ा था, लेकिन उसके लिए कोई खड़ा नहीं था। इसीलिए इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करिएगा और जब तक भरत तिवारी भाई को इंसाफ नहीं मिल जाता है, तब तक माँग करिएगा।


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